सुनीता विलियम्स कौन है ? Sunita Williams Biography in Hindi

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Sunita Williams , जिन्होंने न केवल अंतरिक्ष में जाकर भारत का गौरव बढ़ाया है, बल्कि कुछ युवतियों के लिए एक आदर्श भी स्थापित किया है। उन्होंने आज अपनी वास्तविक लगन और कठिन परिश्रम के बल पर आज इस मुकाम को हासिल किया है और पूरी दुनिया में अपनी छाप छोड़ी है।

Sunita Williams को यहां तक ​​पहुंचने के लिए अपने दिन-प्रतिदिन के अस्तित्व में कई आशाजनक और निराशाजनक समय का सामना करना पड़ा, हालांकि उन्होंने साहस के साथ आगे बढ़ते हुए जमीन, आकाश, समुद्र में जाने की अपनी कल्पना को संतुष्ट किया। उन्होंने अमेरिकी अंतरिक्ष संगठन नासा के माध्यम से अंतरिक्ष में कदम रखा। इसके साथ ही वह पहली महिला हैं जो कई बार अंतरिक्ष में जा चुकी हैं।

इतना ही नहीं, वह अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अभियान 14 और 15 की सदस्य भी रह चुकी हैं। 2012 में, देश की छोटी लड़की सुनीता विलियम्स ने अभियान 32 में एक फ्लाइट इंजीनियर और अभियान 33 में कमांडर के रूप में भी काम किया।

सुनीता विलियम्स कौन है ? Sunita Williams Biography in Hindi

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सुनीता विलियम्स की जानकारी हिंदी में – Sunita Williams Information in Hindi

नाम : सुनीता माइकल जे. विलियम( विवाहपूर्व – सुनीता दीपक पांड्या)
जन्म : 19 सितम्बर 1965 युक्लिड, ओहियो राज्य
पिता : डॉ. दीपक एन. पांड्या
माता : बानी जालोकर पांड्या
विवाह : माइकल जे. विलियम

सुनीता विलियम्स कौन है ?- who is Sunita Williams

Sunita Williams  (जन्म: 19 सितंबर, 1965 यूक्लिड, ओहायो में) अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के माध्यम से अंतरिक्ष जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला है। यह भारत के गुजरात के अहमदाबाद से ताल्लुक रखती है। इन्होंने एक महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में 195 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने का विश्व किर्तिमान स्थापित किया है।


सुनीता विलियम्स का जन्म और शिक्षा –


सुनीता लिन पांड्या विलियम्स का जन्म 19 सितम्बर 1965 को अमेरिका के ओहियो राज्य में यूक्लिड नगर (स्थित क्लीवलैंड) में हुआ था। मैसाचुसेट्स से हाई स्कूल पास करने के बाद 1987 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की नौसैनिक अकादमी से फिजिकल साइन्स में बीएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। तत्पश्चात 1995 में उन्होंने फ़्लोरिडा इंस्टिट्यूट ऑफ़ टैक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में एम.एस. की उपाधि हासिल की। उनके पिता डॉ. दीपक एन. पांड्या एक जाने-माने तंत्रिका विज्ञानी हैं, जिनका संबंध भारत के गुजरात राज्य से हैं।

सुनीता विलियम्स परिवार –


सुनीता के पिता दीपक एन. पांड्या एक विशेषज्ञ के रूप में एक उल्लेखनीय न्यूरोसाइंटिस्ट हैं, जो भारत के गुजरात प्रांत से हैं। उनकी मां का नाम बोनी जलोकर पांड्या है, जो स्लोवेनिया से हैं। उनके एक बड़े भाई और एक बड़ी बहन भी हैं जिनका नाम जय थॉमस पंड्या और डायना एन, पंड्या है।

आपको बता दें कि 1958 में जब वह एक साल से कम उम्र की थीं, तब उनके पिता ने अहमदाबाद से बोस्टन, यूएसए में आकर बस गए थे।हालाँकि बच्चे अपने दादा-दादी, कई चाचा-चाची और चचेरे भाइयों को छोड़कर बहुत परेशान थे, लेकिन उनके पिता को अपने काम के कारण अमेरिका जाना पड़ा।

अंतरिक्ष में जाने वाली भारत की दूसरी महिला सुनीता विलियम्स को अपने लोगों से काफी प्रेरणा मिलती है। आपको बता दें कि सुनीता के पिता एक बेहद बुनियादी स्वभाव के हैं और एक बुनियादी अस्तित्व में भरोसा रखते हैं जो सुनीता को बहुत पसंद आता है।

साथ ही, उनकी माँ बोनी जालोकर पांड्या अपने परिवार को स्नेह में बांधे रखती हैं और संबंधों की सुखदता पर जोर देती हैं, ठीक उसी तरह जैसे सुनीता ने अपनी माँ से प्राप्त प्रकृति के मूल्यों की अच्छी परख भी है। इसके साथ ही सुनीता विलियम्स भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपना अच्छा उदाहरण मानती हैं। उनके विचारों का पालन करती हैं।

Sunita Williams भी उन लोगों में से एक हैं जिन्हें भगवान में असाधारण विश्वास है, वह हिंदुओं के प्रमुख भगवान गणेश के आराधना में यकीन रखती हैं। इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान, उन्होंने हिंदू धार्मिक ग्रन्थ भगवद गीता भी ली थी, जिसे उन्हें अपनी खाली समय में पढ़ने का मौका मिलता है।

सुनीता विलियम्स का नासा करियर ()


1998 में, सुनीता को नासा के लिए चुना गया था, उस समय, वह यूएसएस सैपान पर ही कार्यरत थीं। उनका अंतरिक्ष यात्री उम्मीदवार प्रशिक्षण अगस्त 1998 में जॉनसन स्पेस सेंटर में शुरू किया गया था। सुनीता विलियम ने वास्तविक प्रतिबद्धता और अपने धैर्य के साथ इस ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया, बाद में 9 दिसंबर 2006 को, सुनीता को रॉकेट ‘डिस्क्लोजर’ से ‘वर्ल्डवाइड स्पेस सेंटर’ से भेज दिया गया। ‘ जहां उन्हें एक्सपीडिशन-14 टीम में शामिल होना था।

आपको बता दें कि अप्रैल 2007 में रूसी अंतरिक्ष यात्री को हटा दिया गया था। जिसकी वजह से यह एक्सपेडिशन-15 बन गया। सुनीता विलियम्स ने एक्सपीडिशन-14 और 15 के दौरान तीन स्पेस वॉक की। 6 अप्रैल 2007 को उन्होंने अंतरिक्ष में ‘बोस्टन मैराथन’ में भी दिलचस्पी ली, जिसे उन्होंने केवल 4 घंटे 24 मिनट में पूरा किया।

इसके साथ ही वह अंतरिक्ष में लंबी दूरी की दौड़ लगाने वाली प्रमुख शख्सियत बन गईं। साथ ही 22 जून 2007 को वह वापस पृथ्वी पर आ गईं।

2012 में, सुनीता अभियान 32 और 33 में शामिल हुईं। उन्हें 15 जुलाई 2012 को बैकोनूर कोस्मोड्रोम से अंतरिक्ष में भेजा गया था। उनका रॉकेट सोयुज ‘ग्लोबल स्पेस सेंटर’ में शामिल हो गया। उन्हें 17 सितंबर 2012 को अभियान 33 का कमांडर बनाया गया था।

ऐसा करने वाली वह सिर्फ दूसरी महिला हैं। सितंबर 2012 में, वह अंतरिक्ष में मैराथन करने वाली पहली व्यक्ति बनीं। 19 नवंबर को सुनीता विलियम्स धरती पर वापस आ गईं।

आपको बतादें कि जब Sunita Williams अपनी ट्रेनिंग कर रही थी तब उन्हें कई तरह के तकनीकी जानकारी समेत तमाम वैज्ञानिक और तकनीकी तंत्रों की ब्रीफिंग, स्‍पेश शटल और अन्‍तर्राष्‍ट्रीय अंतरिक्ष स्‍टेशन की जानकारी भी दी गई।

इस दौरान सुनीता को मनोवैज्ञानिक ट्रनिंग और टी-38 वायुयान के द्वारा प्रशिश्रण दिया गया। अपनी ट्रेनिंग के दौरान सुनीता विलियम्स ने रूसी अंतरिक्ष संस्थान में भी काम किया और इस ट्रेनिंग में उन्हें अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के रूसी टुकड़े के बारे में भी जानकारी दी गई।

सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष मिशन –

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भारतीय मूल की महिला अंतरिक्ष यात्री Sunita Williams ने अपनी कल्पना को पंख देने के लिए दो बार अंतरिक्ष की यात्रा की है, इस भारतीय मूल की महिला ने ग्रह के एक तरफ से दूसरी तरफ अपना ही रिकॉर्ड बनाया है। आपको बता दें कि अंतरिक्ष में अपने पंख लहराने वाली सुनीता विलियम्स अपने दोनों अंतरिक्ष उपक्रमों के दौरान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन ‘अल्फा’ से निकल चुकी हैं।

रियलिटी स्टेशन ‘अल्फा’ में 16 देशों का एक साथ मिलकर काम करने का काम है। स्टेशन अल्फा का की खास बात यह है कि इसमें प्रयोगशालाएं, आवासीय सुविधाएं, रो‍बोटिक भुजा और उड़नशील प्‍लेटफार्म के साथ जुड़ने वाले नोड लगे हुए हैं।। यह स्टेशन भी लगभग एक फुटबॉल मैदान के क्षेत्र में फैला हुआ है।

सुनीता विलियम्स की पहली अंतरिक्ष उड़ान

किशोरावस्था से ही अंतरिक्ष में उड़ान के बारे में सुनीता विलियम्स की कल्पना 9 दिसंबर 2006 को पूरी हुई। उस समय जब उन्होंने अपना पहला अंतरिक्ष यात्रा की। आपको बता दें कि उनकी पहली अंतरिक्ष उड़ान स्पेस शटल डिस्कवरी के जरिए शुरू हुई थी। अपने पहले अंतरिक्ष उद्यम के दौरान, भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स ने कुल 321 दिन 17 घंटे और 15 मिनट अंतरिक्ष में बिताए।

Sunita Williams अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लंबे समय तक चलने वाले अंतरिक्ष खोजकर्ता समूह की उड़ान विशेषज्ञ थीं, बाद में वह बेहद टिकाऊ अंतरिक्ष खोजकर्ता टीम 15 की उड़ान डिजाइनर भी बन गईं। इसके साथ ही वह दुनिया की दूसरी महिला भी हैं, जिनको अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के कमांडर बनाया गया। साथ ही आपको बता दें कि सुनीता विलियम्स अपनी अगली अंतरिक्ष उड़ान के दौरान तीन स्पेस वॉक कर चुकी हैं।


स्पेस वॉक क्या है?-


अंतरिक्ष में शटल को छोड़कर (जिसके अंदर की जलवायु लोगों के लिए पृथ्वी जैसी है) खाली स्थान (जहां जलवायु लोगों के लिए अविश्वसनीय रूप से जोखिम भरा है, निर्वात है, विकिरण से भरी हुई है और उल्काओं की ओर झुकी हुई है) अंदर आकर कई तरह के सुधार कर के कामों को करने को स्पेसवॉक कहलाता है।

अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में सैर पर जाने के लिए एक अलग तरह का सूट पहनते हैं, इस सूट में अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाले व्यक्ति के लिए उनके जीवन रक्षक ढांचे और अन्‍य सुविधाएं भी लगी रहती हैं। अपने अंतरिक्ष प्रवास के दौरान सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष स्टेशन के अंदर कुछ परीक्षणों का निर्देशन भी किया। सुनीता विलियम्स भी फिट रहने के लिए रोजाना ट्रेडमिल पर अंतरिक्ष में व्यायाम करती थीं।

सुनीता ने अंतरिक्ष से बोस्टन मैराथन में भाग लिया

16 अप्रैल, 2007 को, अपनी अंतरिक्ष उड़ान के दौरान, विलियम्स ने अंतरिक्ष से बोस्टन मैराथन में भाग लिया। खास बात यह है कि उन्होंने इसे केवल 4 घंटे 24 मिनट में पूरा किया। आपको बता दें कि लंबी दूरी की इस रेस में सुनीता की बहन डायना ने भी दिलचस्पी ली थी। अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान के व्यावहारिक रूप से सब कुछ खत्म करने के बाद, वह 22 जून 2007 को स्पेस शटल अटलांटिस के माध्यम से पृथ्वी पर वापस आ गई।

सुनीता विलियम्स की अगली अंतरिक्ष उड़ान

21 जुलाई, 2011 को अमेरिकी अंतरिक्ष शटल रिटायर हो गईं थी। इसके साथ ही सुनीता की अगली अंतरिक्ष उड़ान 15 जुलाई 2012 को रूस के बैकानूर कोस्मोड्रोस से रूसी अंतरिक्ष ‘सोयुज टीएमए-05’ से शुरू हुई। इस मिशन में सुनीता अंतरिक्ष स्टेशन के स्‍थायी दल 32/33 से एक व्यक्ति के रूप में गईं। 17 जुलाई 2012 को सयुज रॉकेट अंतरिक्ष स्टेशन ‘अल्फा’ से जुड़ गया।

Sunita Williams को 17 सितंबर 2012 को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की दूसरी महिला कमांडर बनने का सम्मान मिला था। आपको बता दें कि इस स्टेशन पर पहुंचने वाली प्रमुख महिला नेता पैगी हिट्सॉल थीं। अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को उनकी अंतरिक्ष उड़ान में जापानी अंतरिक्ष संस्थान के अंतरिक्ष यात्री अकी होशिंदे और रूसी अंतरिक्ष यात्री यूरी मालेनचेंको ने शामिल किया था। इसके साथ ही, अपनी बाद की अंतरिक्ष यात्रा के दौरान विलियम्स ने 3 स्पेस वॉक की। सुनीता विलियम्स ने कुल 7 स्पेस वॉक की हैं। बाद की अंतरिक्ष यात्रा के दौरान, सुनीता विलियम्स अपने सभी प्रशिक्षण कार्यों को पूरा करने के बाद 19 नवंबर, 2012 को पृथ्वी पर वापस आ गईं।

सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में उठाया भारतीय तिरंगा

Sunita Williams भारत के 66वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2012 को अंतरिक्ष में उपलब्ध थीं, जब उन्होंने अंतरिक्ष में आजादी का जश्न मनाया और अंतरिक्ष में भारतीय तिरंगा लहराया।

इस दौरान सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष से (अल्फा स्टेशन के अंदर से) भी एक संदेश दिया गया जिसमें उन्होंने कहा- ‘पंद्रह अगस्त के लिए मैं भारत के स्वतंत्रता दिवस की शुभ सूचना भेजती हूं। भारत एक आम, हिंदू और उपलब्धियों से भरा देश है, इस मौके पर सुनीता ने भारत का हिस्सा बनकर खुश होने की भी चर्चा की।

सुनीता विलियम्स द्वारा बनाया गया विश्व रिकॉर्ड – Sunita Williams Record


Sunita Williams ने अपनी क्षमता, मानसिक दृढ़ता और कठिन परिश्रम के बल पर यह प्रदर्शित किया है कि महिलाएं पुरुष से कम नहीं हैं, इतना ही नहीं उन्होंने कई विश्व रिकॉर्ड भी बनाए हैं, सुनीता विलियम्स द्वारा निर्धारित विश्व रिकॉर्ड  एक नजर  –

सुनीता विलियम्स ने अपने पहले अंतरिक्ष उद्यम के दौरान 321 दिन 17 घंटे और 15 मिनट अंतरिक्ष में गुजारी। इस विस्तारित प्रवास के माध्यम से, उन्होंने एक विश्व रिकॉर्ड बनाया। वह एक अकेली उड़ान में इतनी लंबी यात्रा करने वाली ग्रह की प्रमुख महिला हैं।


भारतीय मूल की अंतरिक्ष खोजकर्ता Sunita Williams अंतरिक्ष में सबसे अधिक स्पेसवॉक करने वाली पहली महिला अंतरिक्ष खोजकर्ता हैं। आपको बता दें कि उनके द्वारा किए गए 7 स्पेसवॉक की कुल लंबाई 50 घंटे 40 मिनट थी।


वह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की कमांडर बनने वाली दुनिया की दूसरी महिला हैं।


सुनीता विलियम्स का भारत का दौरा

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भारतीय मूल के अंतरिक्ष अन्वेषक ने अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान भरने के बाद सितंबर 2007 में भारत का दौरा किया और अहमदाबाद में महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम और उनके स्थानीय शहर (झुलासन, मेहसाणा के करीब) का दौरा किया।

इसी तरह उन्हें इस अवधि के दौरान विश्व गुजराती समाज द्वारा ‘सरदार वल्लभभाई पटेल विश्व प्रतिमा पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था। आपको बता दें कि वह यह सम्मान पाने वाली भारतीय मूल की प्रमुख महिला हैं। अपनी भारत यात्रा के दौरान सुनीता विलियम्स ने 04 अक्टूबर 2007 को दिल्ली के अमेरिकी दूतावास स्कूल में भी भाषण दिया, जिसके बाद उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी मुलाकात की और अपने अंतरिक्ष यात्रा के अनुभवों को साझा किया।

Sunita Williams ने अब तक 30 अद्वितीय अंतरिक्ष यानों की कुल 2770 यात्राएं भी की हैं।

सुनीता विलियम्स की शादी – Sunita Williams Marriage


आपको बता दें कि जब उन्होंने 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एम.एससी किया था। जब वह विलियम्स से माइकल जे. से मिलीं तो वह अपनी स्कूली शिक्षा हासिल कर रही थीं। पहले दोस्त बने और उनकी ये दोस्ती प्यार में बदल गई, जिसे बाद में उन दोनों ने एक-दूसरे से शादी करने का फैसला किया, इसलिए उन दोनों ने शादी कर ली।

आपको बता दें कि माइकल जे विलियम भी एक समुद्री पायलट, हेलीकॉप्टर पायलट, एयरक्राफ्ट टेस्टर, कुशल नाविक और जम्पर हैं।

सुनीता विलियम्स करियर-Sunita Williams Career


भारतीय मूल की अमेरिकी नौसेना की कमांडर सुनीता बाकी युवतियों के मामले में अद्वितीय थीं। उनका बचपन से सपना कुछ अलग करने का था। वह जमीन आसमान समुद्र हर जगह जाना चाहती थी।

शायद इसीलिए वह मई 1987 में यूएस नेवल अकादमी के माध्यम से नौसेना में भर्ती हुई और बाद में एक हेलीकॉप्टर पायलट में बदल गई। उन्हें एक ‘फंडामेंटल डाइविंग ऑफिसर’ के रूप में नियुक्त किया गया था, बाद में एक आधे साल की अस्थायी पोस्टिंग (नौसेना तटीय कमान में)। उसके बाद उन्हें नेवल एयर ट्रेनिंग कमांड में तैनात किया गया और जुलाई 1989 में उन्हें नेवल एविएटर का पद दिया गया।

बाद में उन्हें ‘हेलीकॉप्टर कॉम्बैट सपोर्ट स्क्वाड्रन’ में पर नियुक्ति किया गया। सुनीता विलियम ने एच-46 सागर-नाइट के साथ हेलिकॉप्टर कॉम्बैट सपोर्ट स्क्वाड्रन 3 (एचसी-3) में अपनी अंतर्निहित तैयारी शुरू की।


बाद में Sunita Williams को वर्जीनिया के नॉरफ़ॉक में हेलीकॉप्टर कॉम्बैट सपोर्ट स्क्वाड्रन 8 (HC-8) की जिम्मेदारी सौंप दी गई। आपको बता दें कि इस दौरान सुनीता विलियम कई जगहों पर तैनात रहीं। भूमध्यसागरीय, लाल सागर और फारस की खाड़ी में, उन्होंने ‘एक्टिविटी डेजर्ट शील्ड’ और ‘एक्टिविटी प्रोवाइड कम्फर्ट’ के दौरान सेवा की।

वहां उन्होंने UH-60, OH-6 और OH-58 जैसे हेलीकॉप्टरों से उड़ान भरी। फिर उन्हें यूएसएस सायपन में एक हवाई जहाज प्रशासक और सहयोगी वायु प्रमुख के रूप में भेजा गया। इस दौरान सुनीता ने 30 अलग-अलग विमानों में 3,000 घंटे की उड़ान भरकर लोगों को चौंका भी दिया था।

सुनीता विलियम्स को प्राप्त पुरस्कार – Sunita Williams Achievements

Sunita Williams को उनकी उपलब्धियों के लिए कई सम्मान और प्रशंसा मिली है। सुनीता विलियम्स एक समुद्री पायलट, हेलीकॉप्टर पायलट, कुशल नाविक, जीव प्रेमी, मैराथन धाविका और अंतरिक्ष यात्री और विश्व-रिकॉर्ड धारक हैं। सुनीता विलियम्स को निम्नलिखित अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

  1. नेवी कमेंडेशन मेडल
  2. नेवी एंड मैरीन कॉर्प एचीवमेंट मेडल
  3. ह्यूमैनिटेरियन सर्विस मेडल
  4. मैडल फॉर मेरिट इन स्पेस एक्स्पलोरेशन
  5. सन 2008 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया
  6. सन 2013 में गुजरात विश्वविद्यालय ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की
  7. सन 2013 में स्लोवेनिया द्वारा ‘गोल्डन आर्डर फॉर मेरिट्स’ प्रदान किया गया


यह लेख उस महान महिला की असाधारण इच्छाशक्ति, दृढ़ संकल्प, उत्साह और आत्मविश्वास की कहानी है। उनके इन गुणों ने उन्हें एक पशु चिकित्सक बनने की महत्वाकांक्षा रखने वीली छोटी-सी बालिका के एक अंतरिक्ष-विज्ञानी, एक आदर्श प्रतिमान बना दिया। अंतरिक्ष में अपने छह माह के प्रवास के दौरान, वह पूरी दुनिया में बहुत से लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रही।

सुनीता समुद्र में तैर चुकी है, समुद्र में डुबकी लगा चुकी है, युद्ध और करुणा के कार्य के लिए उड़ानें भर चुकी हैं, अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी हैं और अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटी है और एक जीवंत प्रेरणा के उदाहरण में बदल गई है।

FAQ.

Q. सुनीता विलियम्स कुल कितनी बार अंतरीक्ष मे गई हैं ? How many times has Sunita Williams gone to space?

Ans. सुनीता ने 30 अलग-अलग अंतरिक्ष यानों में 2770 उड़ानें भरीं हैं । वे 2006 में पहली बार अंतरिक्ष गई थी।

Q. भारत के पहले अंतरीक्ष यात्री कौन थे?

Ans. राकेश शर्मा।

Q. सुनीता विलियम्स पृथ्वी से कितने किलोमीटर दूर स्पेसशिप में गई थी?

Ans. सुनीता विलियम्स पृथ्वी से 360 किलोमीटर दूर स्पेसशिप में गई थीं।

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