जानिए Mughal साम्राज्य का रोचक इतिहास – Mughal History in Hindi (1526-1857)

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Mughal History
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जिस समय भारत आए, उस समय किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे काफी समय तक शासन करेंगे। इससे पहले, भारत पर बाहर से कई लुटेरों  ने हमला किया था, और उन्हें भी भारत के साहसी योद्धाओं  ने कुचल दिया था। मुगलों ने साहसी भारतीय सेनानियों और उनके साम्राज्यों को कुचल दिया और उनकी सत्ता और पूरे भारत पर कब्जा कर लिया। मुगल इतिहास में विस्तार से जानिए कि मुगलों ने भारत में अपनी वर्चस्व कैसे स्थापित की।

इब्राहिम लोदी और बाबर के बीच पानीपत की लड़ाई के बाद अप्रैल 1526 में मुगल साम्राज्य की शुरुआत हुई। इस लड़ाई में विजय ने भारत में दिल्ली सल्तनत के शासन को समाप्त कर दिया और पुरातन भारत में मुगल प्रशासन के ढांचे की स्थापना की, जिसके बाद मुगलों ने अठारहवीं शताब्दी तक भारतीय उपमहाद्वीप पर शासन किया, देश की स्वायत्तता का पहला संघर्ष तक । ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के आने तक मुगलों ने भारत में शासन किया।

Mughal साम्राज्य एक असाधारण कुशल, समृद्ध और समन्वित सम्राज्य था। मुगल परंपरा का शासन भारत के पुरातन इतिहास में एक समय परिवर्तन को प्रदर्शित करता है। मुगल भारत में कारीगरी, शिल्प कौशल स्पष्ट रूप से समृद्ध हुआ। भारत में उत्कृष्ट और ऐतिहासिक इमारतों का एक बड़ा हिस्सा मुगल काल के दौरान बनाया गया था।

इन ऐतिहासिक इमारतों में सांची का स्तूप, ताजमहल, आगरा में स्थित दुनिया के सात चमत्कारों में से एक, दिल्ली का लाल किला, अजंता-एलोरा की गुफाएं, उड़ीसा के लोकप्रिय अभयारण्य, खजुराहो अभयारण्य, की शानदार आकृतियां शामिल हैं। तंजौर, शेरशाह सूरी का ग्रैंड ट्रंक रोड, बीजापुर का गोल गुंबद आदि शामिल हैं। इसलिए हमें मुगल प्रशासन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी को जानना चाहिए।

जानिए मुग़ल साम्राज्य का रोचक इतिहास – Mughal in Hindi

Mughal History
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मुगल वंश के बारे मे जानकारी –

साम्राज्यवंश का नाम  –  मुगल वंश

शासन काल – 1526-1857

प्रमुख सत्ताकेंद्र स्थान   

दिल्ली,

औरंगाबाद,

आग्रा

प्रमुख शक्तिशाली शासक   

बाबर,

हुमायूँ,

अकबर,

जहाँगीर,

शाहजहां,

औरंगजेब

शासन काल मे कला से जुडी प्रमुख उपलब्धीया 

ताजमहाल,

लाल किला,

जामा मस्जिद,

बीबी का मकबरा,

लाहोर मस्जिद,

मोती मस्जिद,

तक्ख्त-ए- ताउस इत्यादी

प्रथम शासक  –  बाबर

अंतिम शासक –  बहादूर शाह जफर

साम्राज्य का कुल शासनकाल    लगभग 331 साल

मुगल वंश के शासकों की सूची

  • शासक का नाम     –  शासनकाल
  • बाबर     – (30 अप्रैल 1526-26 दिसम्बर 1530)
  • हुमायूं     -(26 दिसम्बर 1530 – 17 मई 1540)
  • अकबर    – (27 जनवरी 1556 – 27 अक्टूबर 1605)
  • जहांगीर   – (27 अक्टूबर 1605 – 8 नवम्बर 1627)
  • शाहजहाँ  – (8 नवम्बर 1627 – 31 जुलाई 1658)
  • औरंगजेब -(31 जुलाई 1658 – 3 मार्च 1707)
  • बहादुरशाह          – (19 जून 1707 – 27 फ़रवरी 1712)
  • जहांदार शाह        –  (27 फ़रवरी 1712 – 11 फ़रवरी 1713)
  • फर्रुख्शियार          – (11 जनवरी 1713 – 28 फ़रवरी 1719)
  • मोहम्मद शाह        -(27 सितम्बर 1719 – 26 अप्रैल 1748)
  • अहमद शाह बहादुर -(26 अप्रैल 1748 – 2 जून 1754)
  • आलमगीर द्वितीय    – (2 जून 1754 – 29 नवम्बर 1759)
  • शाह आलम द्वितीय  -(24 दिसम्बर 1760 – 19 नवम्बर 1806)
  • अकबर शाह द्वितीय – (19 नवम्बर 1806 – 28 सितम्बर 1837)
  • बहादुर शाह द्वितीय -(28 सितम्बर 1837 – 14 सितम्बर 1857)

मुगल वंश का इतिहास – Mughal Samrajya ka Itihas

Mughal History
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Mughal History in Hindi में भारत में मुगल राजवंश ने कई सौ वर्षों तक राज किया। मुगल शासकों ने हज़ारों-लाखों लोगों पर शासन किया। भारत उस समय एक नियम के तहत एकत्र हो गया और यहां विभिन्‍न प्रकार की सांस्‍कृतिक और राजनीतिक पहल देखी गई। Mughal History in Hindi में पूरे भारत में इससे पहले अनेक मुस्लिम और हिंदू राजवंश आपस में भिड़ते थे, उसके बाद मुगल राजवंश के संस्‍थापक यहां आए। इनमें से एक था बाबर, जो तैमूर लंग का पोता था और गंगा नदी की घाटी के उत्तरी क्षेत्र से आए विजेता चंगेज़खान, जिसने खैबर पर कब्‍जा करने का निर्णय लिया और अंतत: पूरे भारत पर कब्‍ज़ा कर लिया।

यहां हम आपको Mughal वंश के प्रमुख शासकों और उनके कार्यालय के बारे में संक्षिप्त में जानकारी उपलब्ध करवा रहे हैं।

मुगल वंश के संस्थापक बाबर (30 अप्रैल 1526-26 दिसम्बर 1530)

वर्ष 1526 में पानीपत की लड़ाई के बाद, लोदी वंश और दिल्ली सल्तनत का भारत में अंत हो गया और बाबर द्वारा मुगल- Mughal वंश की स्थापना की गई। एक नज़र में बाबर के बारे में

  • पूरा नाम    -जहीर-उद-दिन मुहम्मद बाबर
  • जन्म   – 14 फरवरी, 1483, अन्दिझान (उज्बेकिस्तान)
  • पिता    -उमर शेख मिर्जा (फरगना राज्य  के शासक)
  • माता   -कुतलुग निगार खानुम

पत्नियां

  • आयेशा सुलतान बेगम,
  • जैनाब सुलतान बेगम,
  • मौसमा सुलतान बेगम,
  • महम बेगम,
  • गुलरुख बेगम,
  • दिलदार अघाबेगम,
  • मुबारका युरुफझाई,
  • सहिला सुलतान बेगम,
  • हज्जाह गुलनार अघाचा,
  • नाझगुल अघाचा,
  • बेगा बेगम।

पुत्र / पुत्रियां   

  • हुमायूँ
  • कामरान
  • अस्करी
  • हिन्दाल
  • गुलबदन बेगम

शासन काल

सन 1526 से 1530 ई.

निर्माण

  • क़ाबुली बाग़ मस्जिद,
  • आगरा की मस्जिद,
  • जामा मस्जिद,
  • बाबरी मस्जिद,
  • नूर अफ़ग़ान,

मृत्यु   

26 दिसम्बर 1530–

बाबर ने 1526 में पानीपत की लड़ाई में लोदी परंपरा को हराकर भारत में Mughal साम्राज्य की स्थापना की। इस संघर्ष के बाद दिल्ली सल्तनत भी का भी अंत हो गया था और बाबर ने दिल्ली और आगरा को शामिल किया। बाबर ने भारत पर कई बार हमला किया।  उसने 1519 में यूसुफजई जाति के खिलाफ भारत में अपना पहला संघर्ष छेड़ा था, इस अभियान में बाबर ने बाजौर और भेरा को अपने कब्जे में कर लिया था।

17 मार्च 1527 में Mughal सम्राट बाबर ने खानवा की लड़ाई में मेवाड़ के शक्तिशाली शासक राणा सांगा को पराजित किया।

1659 ई. में, बाबर ने घाघरा के संघर्ष में फिर से अफगान सशस्त्र बल को कुचल दिया। मुगल शासक अविश्वसनीय रूप से दयालु भी एक मजबूत शासक था, जिसे उसकी उदारता के लिए कलंदर की उपाधि दी गई थी।

बाबर ने अपना व्यक्तिगत इतिहास बाबरनामा बनाया। बाबर की मृत्यु के बाद, उसके बच्चे हुमायूँ ने मुगल साम्राज्य के शासन पर नियंत्रण कर लिया।

मुगल सम्राट हुमायूं:(1530-1540, 1555-1556)

  • पूरा नाम    – नासीरुद्दीन मुहम्मद हुमायूं
  • जन्म    – 6 मार्च, सन् 1508 ई., क़ाबुल
  • पिता    -बाबर
  • माता   -माहम बेगम
  • शासन काल – (26 दिसंबर, 1530 – 17 मई, 1540 ई. और 22 फ़रवरी, 1555 – 27 जनवरी, 1556 ई.)
  • उत्तराधिकारी   – अकबर
  • मृत्यु    – 27 जनवरी, सन् 1555 ई., दिल्ली

हुमायूँ दूसरा Mughal शासक था, उसने 23 साल की उम्र में मुगलों को उच्च स्थान दिया। हुमायूँ और शेर शाह के बीच कन्नौज और चौसा की झड़प में, हुमायूँ को शेर शाह ने कुचल दिया, जिसके बाद हुमायूँ ने भारत छोड़ दिया। उसके बाद हुमायूँ ने सिकंदर को हराकर 1555 में दिल्ली की विशेषाधिकार प्राप्त स्थिति पर अधिकार कर लिया। मुगल सरदार हुमायूं ने सात दिनों में सात दिनों के लिए सात अद्वितीय रंगों के वस्त्र पहनने के लिए दिशानिर्देश बनाए थे।

अकबर (शासनकाल 1556-1605)

हुमायूँ के गुजरने के बाद, उसके बच्चे अकबर ने मुगल उच्च पद पर अधिकार कर लिया। अकबर को 14 साल की उम्र में मुगल बना दिया गया था, उसके पिता के पुजारी बैरम खान उनके समर्थक के रूप में थे। अकबर को मुगलों में सर्वश्रेष्ठ संप्रभु के रूप में देखा जाता है। मुगल सम्राट अकबर के शासन के दौरान मुगल साम्राज्य की एक नई शुरुआत हुई। हल्दीघाटी की लड़ाई में, अकबर को महाराणा प्रताप ने कड़ी टक्कर दी थी और अकबर की हार निश्चित थी, हालांकि अपने दोस्तों और परिवार की बिक्री के कारण, महाराणा प्रताप इस संघर्ष को हार गए।

इस समय के दौरान, मुगल साम्राज्य का विस्तार भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश भाग पर हुआ। अकबर ने पंजाब, दिल्ली, आगरा, राजपुताना, गुजरात, बंगाल, काबुल, कंधार में अपना डोमेन स्थापित किया था।

आगरा किला, बुलंद दरवाजा, फतेहपुर सीकरी, हुमायूं मकबरा, इलाहाबाद किला, लाहौर किला, और सिकंदरा में उनका अपना दफन कक्ष सहित अकबर के शासन के दौरान कुछ इमारत मैग्नम ऑप्स भी बनाए गए थे। अकबर का अपना “क्लैमोर ए-इलाही” धर्म था।

जहाँगीर (शासनकाल 1605-1627)

अकबर के निधन के बाद उसका बच्चा सलीम (जहांगीर) मुगल साम्राज्य का नेता बना। जहांगीर के शासन में मुगल साम्राज्य का विस्तार किश्वर और कांगड़ा से अलग बंगाल तक किया गया था, फिर भी कोई महत्वपूर्ण लड़ाई और उपलब्धि हासिल नहीं हुई है।

जब जहांगीर ऊंचे पद पर चढ़ा तो उसके पुत्र खुसरो ने सत्ता पाने की लालसा में उसके खिलाफ एक चाल चली, जिसके बाद जहांगीर और उसके बच्चे के बीच भयंकर लड़ाई हुई। साथ ही सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी ने खुसरोतों की मदद करने के बाद इस संघर्ष में जहांगीर ने उसे मार डाला।

शाहजहाँ (शासन 1627-1658)

शाहजहाँ ताजमहल के विकास से जुड़ा है, दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक, उसने अपनी प्यारी बेगम मुमताज महल की याद में इस अद्भुत संरचना का निर्माण किया था।

Mughal साम्राज्य के सबसे प्रसिद्ध मुखिया शाहजहाँ को उसकी अंतरराष्ट्रीय रणनीति के लिए भी आसपास के राज्यों ने कमाल माना था। शाहजहाँ ने अपने शासन काल में मुगल काल की कारीगरी और संस्कृति को जोरदार ढंग से आगे बढ़ाया, इसलिए शाहजहाँ के समय को इंजीनियरिंग का शानदार समय और भारतीय प्रगति का सबसे समृद्ध समय कहा जाता है। इसके साथ ही, शाहजहाँ को उसके जीवन के कुछ समय हाल ही में आगरा के किले में उसके क्रूर बच्चे औरंगजेब ने बंदी बना लिया था।

औरंगजेब (शासनकाल 1658-1707)

Mughal इतिहास में औरंगजेब अपने पिता शाहजहाँ को लम्बे समय तक बन्दी बनाकर रखने के बाद मुगल उच्च पद के ऊँचे पद पर विराजमान था। औरंगजेब मुग़ल प्रशासन का प्रमुख नेता था, जिसने 49 भारत का प्रबंधन किया।

अपने शासन के दौरान, औरंगजेब ने भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकांश हिस्से पर अपने अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया। औरंगजेब ने अपने शासन के दौरान कई लड़ाइयाँ जीतीं, फिर भी मराठा साम्राज्य के प्रवर्तक छत्रपति शिवाजी महाराज ने उन्हें कुचल दिया।

मुगल इतिहास हिंदी में – Mughal History in Hindi

  • बहादुर शाह प्रथम (शासन 1707-1712)
  • फर्रुखशियार (शासनकाल 1713-1719)
  • मुहम्मद शाह (शासन 1719-1748)
  • अहमद शाह बहादुर (शासन 1748-1754)
  • आलमगीर द्वितीय (शासन 1754-1759)
  • शाह आलम द्वितीय (शासनकाल 1759-1806)
  • अकबर शाह द्वितीय (शासन 1806-1837)
  • बहादुर शाह जफर (शासन 1837-1857) अंतिम मुगल मुखिया

मुगल इतिहास में महत्वपूर्ण युद्ध और मुगलों की सर्वोच्चता

  • 1526 – पानीपत की पहली लड़ाई – मुगल सम्राट बाबर ने दिल्ली सल्तनत के राजा इब्राहिम लोदी को कुचल दिया और भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की।
  • 1527 – खानवा का युद्ध – बाबर ने वीर राणा सांगा को कुचल दिया।
  • 1529 – घाघरा की लड़ाई – बाबर ने अफगान और बंगाल के सुल्तान को हराया।
  • 1539 – चौसा का युद्ध – सूरी परंपरा के राजा शेर शाह सूरी ने मुगल शासक हुमायूँ को कुचल दिया।
  • 1556 – पानीपत की दूसरी लड़ाई – मुगल सम्राट अकबर ने हिंदू राजा हेमू को हराया।
  • 1567 – थानेसर का युद्ध – अकबर ने भिक्षुओं की दो सभाओं को कुचल दिया।
  • 1575 – तुकारोई की लड़ाई – अकबर ने बिहार और बंगाल की सल्तनत को हराया।
  • 1576 – हल्दीघाटी का युद्ध – अकबर ने साहसी महाराणा प्रताप को कुचल दिया।
  • 1658 – सामूगढ़ की लड़ाई – मुगल सम्राट औरंगजेब और मुराद बख्श ने दारा शिकोह को कुचल दिया।
  • 1659 – खजवा की लड़ाई – औरंगजेब ने अपने ही भाई शाह शुजा को कुचल दिया।
  • 1671 – सरायघाट की लड़ाई – अहोम संप्रभु लचित बोरफुकन ने मुगल सशस्त्र बल को संबोधित करते हुए राम सिंह को हराया।
  • 1739 – करनाल की लड़ाई – ईरानी नादिर शाह ने मुगल सम्राट मुहम्मद शाह पर विजय प्राप्त की और मुगल साम्राज्य से महत्वपूर्ण कोहिनूर रत्न और मोर की बुलंद स्थिति को लूट लिया।

मुगल साम्राज्य के बारे में रोचक तथ्य –

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Mughal शासक शाहजहाँ, जिसका गौरव इतिहास में धरती पर एक कारीगरी प्रेमी के रूप में मिलता है, जिसने शिल्पकला और भव्य स्मारक को गढ़ा, फिर भी उस काल में अपने लिए अत्यंत मूल्यवान रत्नों और मोतियों से बना एक रमणीय उच्च स्थान भी बनाया। इस अद्वितीय उच्च पद का नाम तख्त-ए-तौस था, एक अरबी शब्द जिसका अर्थ मोर होता है, शाहजहाँ इसे मयूर सिंहासन कहते थे, जिसकी उत्कृष्टता ताजमहल जैसी कुछ थी।

फिर भी, बर्बर घुसपैठिए नादिर शाह के हमले में दिल्ली को लूटा गया, जिसमें इस मोर के सिंहासन को दिल्ली से ईरान ले जाया गया। नादिर शाह की इराण मे हत्या के बाद से ये सिंहासन अभी तक पहेली बना हुआ है और ये खुलासा नही हो पाया के उसके बाद ये किसके पास है।

भारतीय इतिहास के पन्नों में असाधारण शासक अकबर के स्तर को महत्व दिया जाता है। जैसा कि इतिहास के विशेषज्ञों और पुराने प्रमाणों के आकलन से पता चलता है, अकबर एक अज्ञानी व्यक्ति था, जिसे डिस्लेक्सिया का संक्रमण था, उदाहरण के लिए पढ़ने और लिखने में समस्या। इसका उल्लेख अबुल फजल की आइन-ए-अकबरी में भी मिलता है।

कीमती कोहिनूर गहना मुग़ल साम्राज्य साम्राज्य के अधीन था, जिसे मुग़ल शासकों ने सिर पर ताज पहनाया था। जो भी हो, यह कीमती रत्न भारत से भी लूटा गया था और नादिर शाह की लूट से ईरान ले जाया गया था और बाद में इसे अंग्रेजों ने ईरान के स्वामी से पाया था, जो आज तक उनके ही अधीन है।

बाबर का बच्चा हुमायूँ दूसरे मुगल शासक में बदल गया, जिसकी अफीम और मद्यपान की बहुत अधिक प्रवृत्ति थी। इस नशे में, हुमायूँ को शेर शाह सूरी से पराजय का सामना करना पड़ा । इसके बावजूद शेरशाह सूरी के गुजर जाने के बाद दिल्ली पर Mughal शासक हुमायूं का राज्य फिर से स्थापित हो गया।

मुगल साम्राज्य का सबसे अधिक शासन करने वाला शासक औरंगजेब था, जिसने सत्ता हासिल करने के लिए अपने ही तीन भाई-बहनों की हत्या कर दी थी। औरंगजेब को मराठों द्वारा सबसे कठोर प्रतिशोध मिला, जिसमे मराठा शासन को पूर्णतः नष्ट करने के उद्देश्य से मुगल शासन की राजधानी को दिल्ली से बदलकर महाराष्ट्र के मराठवाडा मे स्थलांतरीत किया गया था। यहाँ जो शहर औरंगजेब ने राजधानी के लिए खुदके के नाम से तय किया था, उसे अब औरंगाबाद कहा जाता है।

सामरिक दृष्टि से मुगल काल के दौरान अकबर के काल में क्षेत्रों के सामरिक टुकड़े, संगठन और व्यवहार में सबसे अधिक परिवर्तन देखा गया, जिसे इतिहास के परिप्रेक्ष्य में जब भी देखा जाता है, अकबर को एक दूर दृष्टी वाला शासक के रूप में देखा जाता है। अकबर के समय में धर्म भेद और धार्मिक कलह आदि कोई बात नहीं है, जिसमें हिंदुओं की यात्रा पर कर भी स्थगित कर दी गई हो। अकबर के दरबार को नव रत्नों के दरबार के रूप में जाना जाता है, जिसमें बीरबल, टोडरमल, तानसेन आदि शामिल थे।

भारत के पूरे अस्तित्व के दौरान, गुप्त साम्राज्य और Mughal सम्राट शाहजहाँ के क्षेत्र को स्वर्ण युग के रूप में जाना जाता है, जहाँ व्यक्तिगत रूप से शिल्प कौशल के उदाहरण कई रमणीय डिजाइनों के साथ स्थापित किए गए थे। जिसे हम आज भी देख सकते हैं और साथ ही उस समय काल की कारागिरी को प्रत्यक्ष अनुभव भी कर पाते है।।

लगभग 331 वर्षों तक भारत पर शासन करने वाले Mughal शासन का सबसे अच्छा विस्तार अकबर, औरंगजेब के अधीन हुआ, जिसमें जब भी आवश्यक दृष्टिकोण से देखा जाता है, तो इन दोनों शासकों के बारे में विचार रूपरेखा एक दूसरे से बहुत ही अनोखी प्रतीत होती है। औरंगजेब एक उत्साही सख्त शासक था, जबकि अकबर एक ऐसा शासक था जिसने लचीलापन के साथ शासन किया।

इस प्रकार, आपने Mughal शासन के बारे में कुछ दिलचस्प तथ्यो का अध्ययन किया है, जिसमें आपको शायद कुछ नया जानकारी  मिला है।

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FAQ.

Q. मुगलों ने कितने साल राज किया? How many years did the Mughals rule?

उत्तर :- लगभग 331 साल

Q. मुगल काल कब से कब तक था? How long was the Mughal period?

उत्तर:- 1526 ई. से 1857 ई. तक भारत में मुगल शासन की स्थापना हुई, जिसका पूर्ण काल ​​331 वर्ष है।

Q. मुगल कहाँ से आये थे? Where did the Mughals come from?

उत्तर:- यह राजवंश कभी कभी तिमुरिड राजवंश के नाम से जाना जाता है क्योंकि बाबर तैमूर का वंशज था। फ़रग़ना वादी से आए एक तुर्की मुस्लिम तिमुरिड सिपहसालार बाबर ने मुग़ल राजवंश को स्थापित किया। उन्होंने उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों पर हमला किया और दिल्ली के शासक इब्राहिम शाह लोधी को 1526 में पानीपत के पहले युद्ध में हराया।

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