Diabetes के लक्षण, कारण और घरेलू उपचार।Home Remedies

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हमारीअनियमित दिनचर्या के कारण हमारा शरीर कई बीमारियों का घर बन गया है। इन्हीं बीमारियों में से एक है यानी । डाइबिटीज़ भले ही एक सामान्य बीमारी हो, लेकिन एक बार किसी को हो जाए, तो ज़िंदगीभर उसका साथ नहीं छोड़तीहैं।डाइबिटीज़ पर नियंत्रण तो किया जा सकता हैं, पर इसे जड़ से ख़त्म नहीं किया जा सकता। डाइबिटीज को अगर नियंत्रित ना किया जाये, तो इसका असर किडनी (गुर्दा), आँख, हृदय तथा ब्लड प्रेशर पर पड़ता हैं।

डायबिटीज के कारण व्यक्ति का अग्न्याशय (Pancreas) पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता या शरीर की कोशिकाएँ इंसुलिन को ठीक प्रकार से प्रतिक्रिया नहीं देतीहै। डायबिटीज के रोगी के शरीर में इन्सुलिन बनना बंद या कम हो जाता है जिस कारण शरीर में चीनी अथवा ग्लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है। आज सिर्फ अधिक उम्र के लोगों में ही नहीं आज के समय में बच्चे भी डायबिटीज की चपेट में आ रहे है।

मधुमेह क्या है? ( ):-()(what is )

इसे कई लोग शुगर की बीमारी भी कहते हैं। यह रोग किसी विषाणु या कीटाणु के कारण नहीं होता हैं। यह अनुचित आहार-विहार, व्यायाम न करना, शारीरिक श्रम कम करना,अत्यधिक तनाव आदि के कारण हो सकता हैं। इसका एक कारण अनुवांशिकता भी है यदि परिवार में किसी सदस्य को या माता-पिता को मधुमेह रोग चला आ रहा हो तो इसके होने की संभावना बढ़ जाती है। जब हमारे शरीर के पैंक्रियाज में इंसुलिन का पहुंचना कम हो जाता है, तो खून में ग्लूकोज़ का स्तर बढ़ जाता है तो इस स्थिति को डाइबिटीज़ कहते हैं।

इंसुलिन का काम शरीर में भोजन को एनर्जी में बदलना होता है और इसी इंसुलिन की वजह से शरीर में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती रहती है। जब किसी को डायबिटीज़ हो जाता है, तो भोजन को एनर्जी में बदलने में दिक्कत होती है, जिसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। डायबिटीज़ का असर शरीर के अन्य अंगों पर पड़ता है, इसकी वजह से शरीर में कई अन्य बीमारियां भी घर कर जाती हैं। डायबिटीज़ के कारण शरीर के अन्य अंगों में दर्द, किडनी की समस्या, आंखों की रोशनी का कमजोर होना और दिल का दौरा तक पड़ने का ख़तरा हो सकता है।

डायबिटीज के प्रकार ( Types of डायबिटीज ) :-

टाइप 1 डायबिटीज (Types 1 Diabetes) :-

डायबिटीज के रोगी के शरीर में इन्सुलिन की मात्रा कम बनने लगती हैं, इसे नियंत्रित किया जा सकता है, पर खत्म नही किया जा सकता है। इसमें रोगी को बाहर से इन्सुलिन दिया जाता हैं। इससे उनका जीवन सामान्य चलता रहता हैं.। टाइप 1 डाइबिटीज में अग्नाशय की बीटा कोशिकाएँ इन्सुलिन नहीं बना पाती हैं, इसका असम्भव हैं। यह डायाबिटिज बच्चों और 20 साल तक के युवाओं पर ही जल्दी असर डालती है।

टाइप 2 डायबिटीज (Types 2 Diabetes) :-

टाइप 2डायबिटीज के रोगी के शरीर में इन्सुलिन की मात्रा कम होती हैं या शरीर इन्सुलिन का पुर्णतः इस्तेमाल नहीं कर पाता है। हमारा शरीर इन्सुलिन बनाता तो है, लेकिन कम मात्रा में बनाता है और कई बार वो इन्सुलिन अच्छे से काम नहीं कर पता है। टाइप 2 डाइबिटीज़ को उचित आहार-विहार से , व्यायाम करके , शारीरिक श्रम करके ,तनाव को काम करके नियंत्रित किया जा सकता हैं। यह डायाबिटिज वयस्कों को होती है।

डायाबिटिज होने के लक्षण () :-

हर किसी व्यक्ति को मधुमेह के कुछ लक्षणों का पता होना जरूरी है।कयोंकि हम इन पर अगर समय रहते ध्यान देते हैं, तो इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। मधुमेह के ऐसे ही कुछ लक्षण इस प्रकार हैं-

-बार-बार पेशाब लगना।
-वजन का बढ़ना या कम होना।
-अत्यधिक भूख लगना।
-अधिक नींद आना ।
-प्यास ज्यादा लगना।
-आँख में कम दिखाई देना।
-जल्दी थकान होना।
-बार-बार त्वचा में किसी भी चीज का जल्दी इन्फेक्शन होना।
-घाव का जल्दी न भरना।
-व्यवहार में चिड़चिड़ापन होना।

अगर इनमे से कोई भी लक्षण आपको अपने शरीर में दिखे, तो एक बार डायबिटीज़ की जांच ज़रूर कराएं।

डायाबिटिज होने के कारण (Reason of Diabetes) :-

-व्यायाम या कोई शारीरिक श्रम नहीं करने से ।
-ज़्यादा तला हुआ बाहर का खाना खाने से।
-बढ़ता हुआ वज़न भी डायबिटीज़ का कारण हो सकता है।
-उच्च रक्त चाप के कारण।
–ज़्यादा मीठा खाना से ।
-अनुवांशिक कारण से।ज्यादा तनाव के कारण।

-शराब, ड्रग्स, स्मोक करने से।
-बढ़ती उम्र से भी डायबिटीज़ हो सकती है।

-ज्यादा तनाव के कारण।

डायाबिटिज होने का पता करने के लिए टेस्ट :-

आपको डायबिटीज़ है या नहीं इसका पता करने के लिए आप ये टेस्ट करा सकते हैं। ग्लूकोज फास्टिंग टेस्ट,रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट,ए1सी टेस्ट,ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट

डायबिटीज़ के घरेलु उपचार Diabetes home remedie(how to control Diabetes)

करेले से :- करेला का जूस निकालकर उसमें थोडा पानी ,स्वादानुसार नमक, कालीमिर्च और नींबू का रस मिला लें।और इसे पीएं।आप हर रोज़ सुबह खाली पेट इसका सेवन कर सकते हैं।आप करेला की सब्जी या चिप्स को अपने रोज के खाने में खा सकते हैं।

तुलसी से :- डायबिटीज के रोगी को रोज दो से तीन तुलसी के पत्ते खाली पेट खाने चाहिए। तुलसी के रस को निकाल कर सुबह खली पेट १ या 2 चम्मच तुलसी के रस को पीएं। इससे शुगर या डायबिटीज के लक्षणों में कमी आती है।

जामुन से उपचार :-

जामुन से :- आप एक चम्मच शहद के साथ जामुन का सेवन करें। इसमें मौजूद पोषक तत्व ब्लड शुगर को बहुत हद तक नियंत्रित करते है। जामुन की पत्ती, फल, बीज सभी डायाबिटिज नियंत्रित करने में सहायक है। आप चाहे तो जामुन के बीज को पीसकर पाउडर बनाकर भी रख सकते हैं ,कयोंकि ये एक मौसमी फल है।

आंवला से :- आंवले का रस निकलकर इसमें चुटकी भर हल्दी और शहद मिलाकर पीएं।आमला में विटामिन C होता है जो डायाबिटिज नियंत्रित करने में सहायक होता है।

मेथी से :-दो चम्मच मेथी दाने में दो कप पानी मिलाएं और मैथी को रात भर भिगोयें। अगले दिन पानी को छानकर खाली पेट पीएं। इससे आपका ब्लड शुगर लेवल कम होगा।

दालचीनी से उपचार :-

दालचीनी से :- आधा चम्मच दालचीनी पाउडर लेकर उसे एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर रोज सुबह पिएँ। दालचीनी टाइप 2 डायाबिटिज होने पर उसे नियत्रित करने में बहुत सहायक होता है। यह एंटीऑक्सीडेंट का एक अच्छा स्रोत भी है।

एलोवेरा से :- एलोवेरा जेल बढती हुई ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक है। आप एलोवेरा का रस या डॉक्टर से बात करके एलोवेरा का कैप्सूल भी ले सकते हैं।

नीम से उपचार :-

नीम से :- आप नीम के पत्तों को अच्छे से धोकर सुबह के समय खा सकते हैं। या नीम के पत्तों को पानी में मिलाकर इसका पेस्ट बनाकर सुबह-सुबह पी भी सकते हैं।इसे रोज पीने से कोलेस्ट्रोल की समस्या भी दूर होती है।

ग्रीन टी से :- आप हर रोज सुबह खाली पेट 1 कप ग्रीन टी का सेवन करें। ग्रीन टी में मौजूद पॉलीफेनॉल्स शरीर में ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित कर, मधुमेह के जोखिम को कम करता है।

अदरक से :- थोड़ा सा कद्दूकस किया हुआ अदरक को एक कप पानी में उबाल ले और इसे छानकर इस पानी को ठंडा कर तुरंत पी लें।अदरक एक प्राकृतिक एंटीडाइबेटिक है।

डायाबिटिज होने पर ध्यान रखने योग्य बातें या डायाबिटिज से बचाव कैसे रखे :-

  • खाने की रोज़मर्रा की आदतों में बदलाव लाये, जैसे टुकड़ों में बार बार परन्तु कम भोजन ले , शक्कर ना ले, दिन भर का एक उचित समय सारणी बनाये तथा उसका पालन करें।
  • उचित समय अंतराल में डाइबिटीज़ की जांच कराते रहे। अगर हो सके तो एक मशीन घर पर रखे और रोज सुबह चेक करें।
  • हमेशा अपने वज़न का ध्यान रखें। मोटापा अपने साथ कई बीमारियों को लेकर आता है।
  • डाइबिटीज़ होने के पीछे तनाव भी ज़िम्मेदार होता है। इसलिए, यह ज़रूरी है कि अपने मन को शांत रखें और उसके लिए आप योगासन व ध्यान यानी मेडिटेशन का सहारा लें।

बचाव

  • पर्याप्त 6- 8 घंटे की नींद ले।
  • धूम्रपान से दूर रहें कयोंकि अगर कोई मधुमेह रोगी धूम्रपान करता है, तो उसे ह्रदय संबंधी रोग होने का ख़तरा बढ़ जाता है।
  • मॉर्निंग वॉक एवम योग को रोज़मर्रा की आदतों में शामिल करें।
  • दवाओं को नियमित लेते रहे।
  • फाइबर से भरपूर खाने को ज्यादा से ज्यादा खाएं।
  • ज्यादा से ज्यादा पानी पिते रहे।

हम आशा करते हैं की आपको हमारे दुवारा दिया गया जानकारी से कुछ न कुछ फायदा जरूर होगा। कोई भी घरेलु उपचार करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले।

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