Advocate कैसे बनें ? जानिए पूरी जानकारी – Advocate Kaise Bane

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Advocate Kaise Bane
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वकील को अंग्रेजी भाषा में Advocate या फिर Lawyer कहा जाता है। अगर आप वकील, एडवोकेट या फिर लायर बनना चाहते हैं तो इस पेज पर आपको इसकी पूरी जानकारी प्राप्त होगी। आज के इस लेख में जानेंगे कि , एडवोकेट बनने के लिए क्या करे, , , एडवोकेट बनने का तरीका, , आदि की सारी जानकारीयां विस्तार में जानने को मिलेंगी, इसलिये पोस्ट को लास्ट तक जरूर पढे़ं।

किसी भी career को बनाने के लिए students को काफी मेहनत करनी होती हैं। आज के समय में हर कोई अपना career उस में बनाना चाहता है जिसमें उनकी काफी अच्छी पहचान बने और साथ ही साथ उसमे आर्थिक मंदी का कोई असर नहीं हो। इसके लिए Advocate बनने का चुनना काफी सही है। Advocate की सहायता कानून संबंधित समस्या के समाधान के लिए ली जाती है।

Advocate कैसे बनें ? जानिए पूरी जानकारी – Advocate Kaise Bane

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एडवोकेट किसे कहते हैं? – ?

आपको बता दें कि जो वकील होता है उसे ही एडवोकेट कहते हैं और अधिवक्ता और लॉयर को भी एडवोकेट ही कहते हैं। एडवोकेट अदालत में वकालत करने का काम करता है। जब कोई पीड़ित व्यक्ति किसी एडवोकेट से अपने केस को हैंडल करने की मांग करता है, तब एडवोकेट उस पीड़ित व्यक्ति के आग्रह पर उसके केस को हाई कोर्ट, जिला कोर्ट और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में लेकर जाता है और उसे न्याय देने का काम करता है। कुल मिलाकर एक एडवोकेट अदालत में पीड़ित व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया का पालन करके न्याय दिलाने का काम करता है।

इसको इस प्रकार भी कहा जा सकता हैं की एडवोकेट वो व्यक्ती होता है, जिसने कानून की शिक्षा मे न्यूनतम स्नातक की डिग्री को उत्तीर्ण किया हुआ रहता है। तथा इस प्रकार की शिक्षा प्राप्त व्यक्ती कोर्ट मे अपने मुवक्कील के तरफ से पक्ष रखता है तथा उसे न्याय दिलाने हेतू कानूनी पैतरो का इस्तेमाल करता है।

एडवोकेट बनने की योग्यता –

वैसे इस क्षेत्र में सफलता पाने के लिए आपकी सोच दुसरो से थोड़ी बहुत अलग होनी चाहिए, जिसके लिए आपको पढ़ने की आदत हो, भाषा पर पकड़ और टीम भावना, तर्क वितर्क करना, किसी भी मुद्दे पर बात करना, निर्णय लेने की क्षमता जैसी चीजे आपके अंदर मौजूद होनी चाहिए तभी आप क्षेत्र में सफल हो पाएंगे ।

अगर एडवोकेट के रूप मे करियर बनाना हो तो पात्रता से संबंधित कुछ मानदंडो को पुरा करना आवश्यक बन जाता है, जो के इस प्रकार से होते है –

एडवोकेट बनने के लिए किसी भी प्रकार की एज लिमिट को तय नहीं किया गया है।

Advocate बनने के लिए सबसे पहले तो उम्मीदवार का अपनी 12वी कक्षा को कम से कम 50% अंकों के साथ पास करना जरूरी है।

इच्छुक उम्मिद्वार ने किसी भी शिक्षा धारा से न्यूनतम स्नातक/बैचलर डिग्री की शिक्षा उत्तीर्ण करना यहाँ पर आवश्यक होता है, तथा साथमे कानून शिक्षा की एल.एल.बी डिग्री को उसके पश्चात उत्तीर्ण करना भी अनिवार्य होता है।

जिन छात्रो को कक्षा 12 वी के बाद कानून संबंधी शिक्षा प्राप्त कर इस क्षेत्र मे आगे करियर बनाना होता है उनके लिये इंटिग्रेटेड कोर्स का विकल्प मौजूद होता है। जिसमे बी.ए एल.एल.बी (B.A LLB), बी.एस.सी एल.एल.बी (B.Sc LLB), बी.कॉम एल.एल.बी (B.Com LLB) आदि विकल्प दिये हुये रहते है तो इनमे से किसी भी एक शिक्षा विकल्प को पुरा करना यहाँ पर अनिवार्य होता है।

भारत के विभिन्न युनिवर्सिटीयो मे कानून की शिक्षा विभाग अंतर्गत पात्रता परीक्षा सी.एल.ए.टी (CLAT – Common Law Admission Test) का आयोजन किया जाता है, जिसे उत्तीर्ण करना भी यहाँ पर आवश्यक बन जाता है। जिन छात्रो को इंटिग्रेटेड कोर्स हेतू प्रवेश लेना होता है, उनको इस पात्रता परीक्षा को उत्तीर्ण करना अनिवार्य होता है।

जिन छात्रो ने सफलतापूर्वक कानुन संबंधी शिक्षा का इंटिग्रेटेड कोर्स या फिर स्नातक के बाद एल.एल.बी डिग्री को उत्तीर्ण किया होता है, उन सभी को अनिवार्य तौर पर कानून शिक्षा विभाग द्वारा तय समय की इंटर्नशिप को पुरा करना होता है।

एडवोकेट के प्रकार –

आपकी जानकारी के लिए हम आपको बताना चाहिए कि अलग-अलग फील्ड के हिसाब से एडवोकेट भी कई प्रकार के होते हैं। क्योंकि ज्यादातर लोगों को लगता है कि एडवोकेट दो प्रकार के होते हैं सरकारी एडवोकेट और प्राइवेट एडवोकेट लेकिन ऐसा नहीं है। चलिए जानते हैं कि एडवोकेट कितने प्रकार के होते हैं-

  • सरकारी एडवोकेट
  • प्राइवेट एडवोकेट
  • जूनियर एडवोकेट
  • सीनियर एडवोकेट
  • वरिष्ठ एडवोकेट
  • फैमिली एडवोकेट
  • लोअर, जिला एवं हाई कोर्ट का एडवोकेट
  • सुप्रीम कोर्ट का एडवोकेट

एडवोकेट के पेशें में बेहतर और नए करियर

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लॉ course करने के बाद आप क्रिमिनल और सिविल लॉयर बनने के अलावा जज भी बन सकते है, लेकिन इसके अलावा और भी फ़ील्ड है जिसमे आप जा सकते है चलिए अब उनके बारे में बात करते है.

1.एन्वॉयरनमेंटल लॉयर (Environmental Advocate ):

एन्वॉयरनमेंट लॉ में उन चीजों को नष्ट होने से बचाने की बात की जाती है, जो हमें नेचर की तरफ से प्राप्त हुई हैं। इन मामलों में कई बार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन यानि PIL दायर की जाती हैं, जिसके लिए एन्वॉयरनमेंटल लॉ में एक्सपर्ट लोगों की डिमांड होती है। इसके अलावा ऐसे एनजीओ में भी ऐसे लोगों की मांग होती है, जो एन्वॉयरनमेंट से जुडे मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।

2.साइबर एडवोकेट (Cyber Advocate ):

इस समय देश में ऑनलाइन और साइबर अपराध से जुडे मामले भी सामने में आने लगे हैं। इसमें खासकर फर्जी और धमकी भरे ई-मेल भेजना, कंपनियों के साथ धोखा-धडी, सॉफ्टवेयर की चोरी, एसएमएस हैकिंग, मोबाइल की क्लोनिंग आदि शामिल हैं। इन सब को देखते हुए ही कंप्यूटर और नेटवर्क सुरक्षाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाने लगा है। आपके पास कंप्यूटर एवं डिजिटल फॉरेंसिक एक्सपर्ट बनने का भी सुनहरा अवसर है।

3.पेंटेट एंड कॉपीराइट एडवोकेट (Patent and Copyright Advocate ):

पेटेंट एक ऐसा arrangement है, जिसके तहत किसी भी नई खोज से बनने वाले प्रोडक्ट पर एकाधिकार दिया जाता है। अगर कोई थर्ड पार्टी वह प्रोडक्ट बनाना चाहती है, तो उसे इसके लिए लाइसेंस लेना पडता है और उस पर रॉयल्टी देनी पडती है। Intellectual property बिजनेस कंपीटेंस की खास फील्ड के रूप में उभरा है। भारत में भी इससे जुड़े प्रोफेशनल्स की काफी मांग है।

4.लेबर एडवोकेट (Labor Advocate ):

कर्मचारियों के अधिकार एवं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लेबर लॉ बनाया गया है। इन दिनों इस क्षेत्र से संबंधित समस्याएं अदालत में काफी संख्या में हैं। आप इसमें भी बेहतर करियर बना सकते हैं।

5.इंटरनेशनल एडवोकेट (International Advocate ):

इंटरनेशनल लॉ का अर्थ होता है अंतरराष्ट्रीय कानून। इसके तहत विभिन्न राष्ट्रों के राष्ट्रीय हितों के मध्य उत्पन्न होने वाली समस्याओं को कानून के द्वारा सुलझाया जाता है। यदि आपकी अंग्रेजी अच्छी है और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में रुचि है, तो यह क्षेत्र आपके लिए उपयुक्त है।

6.कॉरपोरेट एडवोकेट (Corporate Advocate ):

अलग अलग तरह के Industry businesses के दौरान टेक्स प्रॉब्लम और दूसरी तरह की प्रॉब्लम का सलूशन करना इनका खास काम है। कारॅपोरेट फील्ड में इस तरह के एक्सपर्ट की खासी मांग है।

एडवोकेट प्रैक्टिस कैसे शुरू करें

नए लॉ ग्रेजुएट को इस बात पर अधिक ध्यान देना चाहिए कि उन्हें अपनी वकालत की प्रैक्टिस कहां से शुरू करनी चाहिए। यह उनके लिए सार्थक परामर्श सिद्ध हो सकता है। किसी भी विश्वविद्यालय से स्नातक होते ही अपने मूल कस्बे या नगर के न्यायालय से ही वकालत आरंभ करना चाहिए। व्यक्ति जिस नगर कस्बे में जन्म लेता और स्कूली शिक्षा लेता है उस नगर कस्बे में उसके अधिक संर्पक होते हैं और वकालत संपर्कों पर निर्भर होती है। मुख्यतः नातेदार और मित्रगण ही हमारे लिए काम लेकर आते हैं। अंजान और नए शहरों में प्रारम्भ में वकालत करने से बचना चाहिए।

प्रारंभ में सत्र एवं जिला न्यायालय में वकालत करें-

जिला एवं सत्र न्यायालय नए नए लॉ में स्नातक होकर एडवोकेट हुए व्यक्ति के लिए मां समान है। फर्स्ट क्लास कोर्ट मां के समान सिखाती है। नए लोग लाइम लाइट के लिए बड़े शहरों में स्थापित उच्च न्यायालय और भारत के उच्चतम न्यायालय की ओर रुख करते हैं, परन्तु वे निचली अदालत के काम काज से कोसों दूर होते हैं। ऐसे लोग संक्षिप्त विचारण और सत्र विचारण तक मे अंतर नहीं समझ पाते। उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय केवल अपीलीय न्यायायल हैं।

वहां केवल विधि के बिंदुओं पर विचार किया जाता है, जबकि निचली अदालत विचारण करती है एवं वाद का संचालन करती है। पहले विचारण और वाद के संचालन की प्रकिया को समझना चाहिए फिर विधि के बिंदु जैसे विषय पर ध्यान देना चाहिए।

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सरकारी एडवोकेट कैसे बने? – ?

Sarkari Vakil अथवा Government Advocate बनने के लिए आपको कानून की डिग्री हासिल करनी होगी। जब आप कानून की डिग्री हासिल कर लेंगे तो आप दो प्रकार से गवर्नमेंट वकील या फिर Government Advocate बन सकते हैं, जो निम्नानुसार है।

  1. एक्सपीरियंस के आधार पर
  2. एपीओ की एग्जाम को पास करने पर
  1. एक्सपीरियंस के आधार पर
    एक्सपीरियंस के आधार पर गवर्नमेंट अथवा सरकारी एडवोकेट बनने के लिए व्यक्ति को कम से कम 7 साल का एक्सपीरियंस हासिल करना चाहिए। इसके अलावा व्यक्ति की उम्र कम से कम 35 साल होनी चाहिए। इसके साथ ही उसके अंदर तर्क वितर्क करने की क्षमता काफी अच्छी होनी चाहिए, ताकि वह प्रसिद्धि को प्राप्त कर सके। इसके अलावा व्यक्ति का अगर किसी नेता के साथ पॉलिटिकल कनेक्शन है, तो गवर्नमेंट आपका सिलेक्शन Public Prosecutor के तौर पर कर सकती है।

एक्सपीरियंस के आधार पर सरकारी एडवोकेट बनने का एक नुकसान यह है कि इसमें गवर्नमेंट आपका सिलेक्शन करती है। इसी कारण गवर्नमेंट जब तक चाहेगी तब तक ही आप Public Prosecutor के पोस्ट पर रह सकेंगे। जब गवर्नमेंट चाहेगी तो वह आपको इस पोस्ट से हटा भी सकती है या फिर आपकी पोजीशन चेंज कर सकती है।

  1. एपीओ की एग्जाम को पास करने पर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर साल सरकारी एडवोकेट बनने के लिए स्टेट गवर्नमेंट के द्वारा एपीओ की एग्जाम का आयोजन करवाया जाता है। इस एग्जाम में भाग लेने के लिए व्यक्ति के पास कानून की डिग्री होनी चाहिए। अगर उसके पास कानून से संबंधित डिग्री है तो वह इस परीक्षा में शामिल हो सकता है और इस परीक्षा को अगर वह पास कर लेता है तो फिर उसका सिलेक्शन सरकारी एडवोकेट के पद पर हो जाता है।

इस प्रकार वह सरकारी एडवोकेट बनने में कामयाब हो जाता है। एक्सपीरियंस के आधार पर Public Prosecutor बनने के बाद सरकार जब चाहे तब आपको आपकी पोस्ट से हटा सकती है, परंतु अगर आप एपीओ परीक्षा को पास करके गवर्नमेंट एडवोकेट बनते हैं, तो आपको स्टेट गवर्नमेंट के द्वारा पद मुक्त नहीं किया जा सकता। यानी कि प्रदेश में चाहे कोई भी सरकार क्यों ना हो, आपकी नौकरी इससे प्रभावित नहीं होगी। आप अपनी पोस्ट पर बने रहेंगे।

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FAQ.

Q. एडवोकेट बनने के लिए कौन सा कोर्स करना पड़ता है? Which course is required to become an advocate?

Ans. एडवोकेट बनने के लिए बैचलर ऑफ़ लेजिस्लेटिव लॉ (एलएलबी) का कोर्स करना पड़ता है।

Q. एडवोकेट का काम क्या है? What is the job of an advocate?

Ans. एक एडवोकेट अपने क्लाइंट को कायदे कानून के अनुसार मार्ग दिखाते है, कानूनी पेपर तैयार करने से लेकर कोर्ट में अपने क्लाइंट के लिए बहस भी करते है ।

Q. एडवोकेट बनने के लिए कौन सा सब्जेक्ट लेना चाहिए? Which subject should I take to become an advocate?

Ans. एडवोकेट बनने के लिए कानून की पढ़ाई (LLB) की जाती है।

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